
Six-Day Course on AI in Higher Education
News & Announcement
BHU का UGC मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र शिक्षकों को व्यावहारिक AI कौशल से लैस करने, नवाचारी शिक्षण को बढ़ावा देने और उच्च शिक्षा में AI-चालित बदलाव का समर्थन करने के लिए छह दिन का कोर्स आयोजित कर रहा है।
यूजीसी मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र, बीएचयू द्वारा 22–27 अगस्त तक उच्च शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग पर छह दिवसीय अल्पकालिक पाठ्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य शिक्षकों को AI के प्रभावी उपयोग के लिए व्यावहारिक कौशल, शैक्षणिक समझ और नैतिक दृष्टिकोण प्रदान करना तथा शिक्षण-अधिगम में नवाचार को बढ़ावा देना है।
उद्घाटन सत्र में बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि AI को प्रतिस्थापन नहीं, बल्कि सहायक के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि AI शिक्षण, अधिगम और शोध में उपयोगी है तथा शोधकर्ताओं को बड़े पैमाने पर उपलब्ध ज्ञान का अधिक प्रभावी ढंग से विश्लेषण और समझने में सहायता कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि AI तकनीकी विकास की निरंतर प्रक्रिया का हिस्सा है, इसलिए इसे किसी चमत्कार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि AI पारंपरिक सूचना खोज से आगे बढ़कर दस्तावेजों में उपलब्ध जानकारी को समझने और उससे सार्थक निष्कर्ष प्राप्त करने में मदद कर सकता है। चैटजीपीटी के अपने अनुभव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि AI की क्षमता केवल संबंधित सामग्री खोजने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह विषय-वस्तु को समझकर उपयोगी अंतर्दृष्टि भी प्रस्तुत कर सकता है। उन्होंने विभिन्न विषयों और संस्थानों से आए प्रतिभागियों के बीच नेटवर्किंग के महत्व पर भी जोर दिया।
सम्मानित अतिथि प्रो. अखिलेश सिंह रघुवंशी, निदेशक, IESD, ने AI को एक ऐसी परिवर्तनकारी तकनीक बताया जिसे डरने के बजाय अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (LLMs) ने तकनीक को अधिक सुलभ बनाया है, जिससे लोग प्राकृतिक भाषा में संवाद कर जटिल विश्लेषणात्मक परिणाम सरल रूप में प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने AI को विशेष रूप से लेखन, शोध और विश्लेषण में सहायक के रूप में उपयोग करने पर जोर दिया।
विशेष अतिथि प्रो. के. श्रीनिवास, NIEPA, नई दिल्ली, ने शिक्षण में AI के एकीकरण की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इससे कक्षाएं अधिक रोचक, सहभागितापूर्ण, संवादात्मक, लचीली, अनुकूलनीय और व्यक्तिगत बनाई जा सकती हैं। उन्होंने इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप बताया।
अपने स्वागत संबोधन में प्रो. आनंद वर्धन शर्मा, निदेशक, UGC-MMTTC, BHU, ने बताया कि केंद्र द्वारा शुरू की गई 12 कार्यक्रमों की श्रृंखला में 9 कार्यक्रम पूरे हो चुके हैं, जिनमें 1,248 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। दो कार्यक्रम वर्तमान में चल रहे हैं और यह कार्यक्रम श्रृंखला की एक और महत्वपूर्ण कड़ी है।
पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. अवधेश कुमार, MMV, ने बताया कि छह दिवसीय ऑफलाइन कार्यक्रम का केंद्रबिंदु उच्च शिक्षा में AI का व्यावहारिक उपयोग है। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को शिक्षण, अधिगम, शोध और शैक्षणिक प्रशासन में AI के प्रभावी उपयोग के लिए व्यावहारिक दक्षता, शैक्षणिक समझ और नैतिक जागरूकता प्रदान करना है।
कार्यक्रम में पाठ योजना, शिक्षण संसाधन विकास, व्यक्तिगत अधिगम, मूल्यांकन, शोध, पाठ्यचर्या निर्माण और शैक्षणिक प्रशासन में AI के उपयोग को शामिल किया गया है। महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, झारखंड और केरल सहित देश के विभिन्न हिस्सों से 50 से अधिक प्रतिभागी इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे हैं।


